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दिवस विशेष चैत्र नवरात्रि का महत्व

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नौवरात्रि पर्व का सीधा संबंध मां दुर्गा से माना जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने रावण का इस दिन वध भी किया था। लेकिन  इन्ही नवरात्रि के नौ दिनों बाद यानी दसवें दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर से युद्ध कर उसका वध भी किया था । मां दुर्गा की उत्‍पत्ति असुरों के राजा रंभ के पुत्र महिषासुर के वध से जुड़ी हुई है। पुराणों के मुताबिक, राक्षसराज महिषासुर ने तपस्या कर ब्रह्राा जी को प्रसन्‍न  कर वरदान प्राप्‍त किया कि वह जब चाहे विकराल और भयंकर भैंसे का रूप धारण कर सके।  इसके अलावा उसने वरदान पाया कि उसे कोई भी देवता या दानव युद्ध में हरा नहीं पाएगा। वरदान मिलने से महिषासुर बलशाली होने के साथ ही अंहकारी भी हो गया था। उसने स्वर्ग पर हमला किया और देवताओं को हराकर कब्जा कर लिया था।  भगवान शिव और भगवान विष्णु भी उसे युद्ध में नहीं हरा पाए। महिषासुर की शक्ति, अहंकार और अत्‍याचार लगातार बढ़ते चले गए। उसका आतंक तीनों लोकों में फैलने लगा। सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि उसके अत्‍याचारों से परेशान होने लगे थे।तब भगवान शिव और भगवान विष्णु ने सभी देवताओं से सलाह लेते हुए एक ...

सफलता और संघर्ष की कहानी

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                     दिनांक 4 .4 .2024                नाम- अलका शुक्ला              पद- सहायक अध्यापक          विद्यालय- प्राथमिक विद्यालय हीरागंज (1-5)                      सफलता एवं संघर्ष की कहानी            प्रथमनियुक्ति -30. 8. 2016          प्रारंभिक परिचय -अलका शुक्ला             BA ,MA BTC, PGDCA,IGD, Fashion.                                                         Designing        वर्तमान कार्य क्षेत्र-प्राथमिक विद्यालय हीरगंज विद्यालय की समस्या एवं समाधान- 30. 8 .2016 को प्राथमिक विद्यालय हीरागंज में प्रथम नियुक्ति हुई । विद्...

पति के मोबाइल से परेशान पत्नी😔

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मैं तो घर की सारी जिम्मेदारी निभाते निभाते थक गई। यह छोटी सी मोबाइल ना जाने,कब इनकी सब कुछ बन गई। महीनो बीत जाते हैं बात तो क्या ,हमारी तरफ देखते तक नहीं। खोए हैं इंटरनेट की दुनिया में ,बाकी कुछ दिखता ही नहीं। सारे रिश्ते भूल बैठे हैं इस मोबाइल के आगे , कब कौन आया कब गया इसकी खबर तक नहीं। सारे रिश्ते बेमाने से बन गए, बस यही मोबाइल इनकी अपनी बन गई । ना बच्चों से कोई मतलब है ना बीवी से कोई मतलब हैं। मैं तो इनसे लड़ते - लड़ते ,झगड़ते - झगड़ते थक गई। ये मोबाइल ना जाने कब इनकी  हमदर्द हमराही हमसफर बन गई। मोबाइल पर प्यार लुटाते हैं मोबाइल पर जान लुटाते हैं। पॉर्न देखकर यह तो अपनी प्यास बुझाते हैं। यह सिर्फ कुआरो की नहीं शादीशुदा मर्दों का भी अय्याशी का अड्डा बन गई। यह थोड़ी सी नहीं पूरी की पूरी इनकी लुगाई बन गई। इनको ना अपना ना बच्चों का भविष्य दिखता है  कुछ भी बोलो फिर तो झगड़ा पक्का है। यह मोबाइल तो इनकी पूरी जिंदगी, और मेरी पक्की सौतन बन गई। यह मोबाइल ना जाने कब इनकी बीवी बन गई। काश मैं मोबाइल बन जाती अपने पति का पूरा प्यार तो पाती। रहती इनके साथ में हरदम बस्ती इनके दिल में हरदम।...

सुनो ओ प्यारे बच्चों की अम्मा

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सुनो ओ प्यारे बच्चों की अम्मा,  इनको यूं ना करो निकम्मा। पहले इनको पढ़ाओ लिखाओ, फिर इनसे तुम बोझ ढोआओ । इन कोमल हाथों को पहले  पेन पकड़ाकर मजबूत बनाओ। थोड़ा सा तुम कष्ट और उठाओ  पहले इनके भविष्य को मजबूत बनाओं। इन कोमल कंधों पर पहले  शिक्षा का बैग तो आने दो । फिर धीरे-धीरे से इनको अपने  सारे जीवन का बोझ  हटाने दो। शिक्षा  में वो ताकत है । जो इनकी तकदीर बदल देगी। फिर ये खुद की क्या  दुनिया की तस्वीर बदल देगे। सुनो ओ प्यारे बच्चों की अम्मा इनको यूं ना करो निकम्मा पहले इनको पढ़ाओ लिखाओ फिर इनसे तुम बोझ ढोआओ ।

अक्षर ज्ञान

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गोल - गोल - गोल - गोल- गोला बनाओ। घूम - घूम - घूम- घूम अक्षर बताओं। क ख ग घ ड़ च छ ज झ ञ गोल - गोल - गोल - गोल- गोला बनाओ। घूम - घूम - घूम- घूम अक्षर बताओं। ट ठ ड ढ ण  त थ द ध न  गोल - गोल - गोल - गोल- गोला बनाओ। घूम - घूम - घूम- घूम अक्षर बताओं। प फ ब भ म य र ल व श ष स ह क्ष त्र ज्ञ गोल - गोल - गोल - गोल- गोला बनाओ। घूम - घूम - घूम- घूम अक्षर बताओं।

तुम साथ हो फिर भी साथ होने का एहसास नहीं

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तुम साथ हो तुम पास हो फिर  भी साथ होने का एहसास नहीं । तुम जान हो तुम जहान हो ऐसा कहने वाले को  मेरे जिंदा होने तक का एहसास नहीं । ये कैसा रिश्ता मिला मुझे जो  सब कुछ होते हुए भी  कुछ भी होने का एहसास नहीं।

गुरु आप कितने श्रेष्ठ हो

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गुरु आप कितने श्रेष्ठ हो , मुझे तो पता ही न चला। वो छोटी छोटी गलती पर टोकना,  कब मेरे जीवन को अनुशासित कर गया । मुझे तो पता ही न चला । वो छोटी-छोटी बातों को सिखाना , कब मेरे जीवन में शिष्टाचार बन गया । मुझे तो पता ही न चला । वो छोटी-छोटी गलतियों पर दंड देना , कब मुझे सही रास्ते पर चलना सिखा गया । मुझे तो पता ही न चला।  वो रोज का थोड़ा-थोड़ा दिया गया ज्ञान , कब मेरे जीवन के अंधकार को दूर कर गया । मुझे तो पता ही न चला। वो आप का मेरे गलत होने पर समझाना,  कब मेरे जीवन को सवार गया।  मुझे तो पता ही न चला । गुरु आप कितने श्रेष्ठ हो , मुझे तो पता ही न चला।