गुरु आप कितने श्रेष्ठ हो

गुरु आप कितने श्रेष्ठ हो ,
मुझे तो पता ही न चला।
वो छोटी छोटी गलती पर टोकना,
 कब मेरे जीवन को अनुशासित कर गया ।
मुझे तो पता ही न चला ।
वो छोटी-छोटी बातों को सिखाना ,
कब मेरे जीवन में शिष्टाचार बन गया ।
मुझे तो पता ही न चला ।
वो छोटी-छोटी गलतियों पर दंड देना ,
कब मुझे सही रास्ते पर चलना सिखा गया ।
मुझे तो पता ही न चला।
 वो रोज का थोड़ा-थोड़ा दिया गया ज्ञान ,
कब मेरे जीवन के अंधकार को दूर कर गया ।
मुझे तो पता ही न चला।
वो आप का मेरे गलत होने पर समझाना,
 कब मेरे जीवन को सवार गया।
 मुझे तो पता ही न चला ।
गुरु आप कितने श्रेष्ठ हो ,
मुझे तो पता ही न चला।

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