ना साड़ी रोकेगी ना चूड़ी रोकेगी मेरी मंजिल पाने से ना पायल रोकेगी।
ना साड़ी रोकेगी ना चूड़ी रोकेगी मेरी मंजिल पाने से ना पायल रोकेगी।
लगा लो हजार परंपरा के पहरे तुम मुझपर
पर फिर भी मेरी आगे बढ़ने की जिद ही जीतेगी।
कितना भी तुम जोर लगालो।
मेरी उड़ान का रास्ता मुझे मिल ही जाएगा ।
चाहे कितना भी तुम मुझ पर पहरा लगा लो।
बस फर्क सिर्फ इतना है ।
बस फर्क सिर्फ इतना है ।
अगर मेरा साथ दे देते तो मंजिल तक जल्दी पहुंच जाती ।
थोड़ी देर तो लगेगी- थोड़ी देर तो लगेगी पर मंजिल जरूर मिलेगी।
ना साड़ी रोकेगी ना चूड़ी रोकेगी मेरी मंजिल पाने से ना पायल रोकेगी।
लगा लो हजार परंपरा के पहरे तुम मुझपर
पर फिर भी मेरी आगे बढ़ने की जिद ही जीतेगी।