मैं तब तक सहती रहती हूं

मैं तब तक सहती रहती हूं
 जब तक मैं सहना चाहूं
 न चाहूं तो क्षण भर में
 तुमको मिट्टी में मिलाऊं।
मैं चाहूं तो पल भर में ,
इस घर को स्वर्ग बनाऊं।
ना चाहूं तो छड़ भर में,
 इस घर को नर्क बनाऊं।
तुम क्यों कमजोरी समझते हो
मेरी इस सहनशक्ति को।
मैं चाहूं तो पल भर में
तुमको दिन में तारे दिखलाऊं।

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