जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी चीज से इतना अधिक लगाव होता है कि उसकी यादें जीवन भर साथ रहती है। और समय-समय पर वह यादें मन को प्रफुल्लित करती हैं। ऐसा ही मेरे दिल के करीब मेरा कमरा जहांँ मैंने अपने जीवन का अधिक से अधिक समय गुजारा। मुझे आज भी याद है वह छोटा सा स्टडीरूम जिसे मैंने अपने हाथों से सजाया,संवारा और घर मे रखी हर एक किताब को उसी कमरे में रखा। उन किताबों को अगर किसी को पढ़ाना है तो उसे उस कमरे में जाना ही पड़ता था। हालांकि बाबा के घुटनो में दर्द होने के कारण उन्हें छत पर बने इस कमरे में जाने में थोड़ा दिक्कत होती थी। इसकी वजह से मुझे काफी डांँट भी पडती थी। किताबें रखना ही था तो सिर्फ अपनी ही किताबें रखती मेरी भी किताबें वहीं पर रख दिया। मैं भी बोलती बाबा, पर किताबों से भरा वह कमरा कितना अच्छा लगता है ना और वहांँ पढ़ना भी। परेशान ना हो बाबा आप की थोड़ी सी कसरत हो जाएगी। पढ़ाई के लिए बनाया गया वह कमरा जहांँ पूरी आलमारी किताबों से भरी एक क्रम से लगी हुई, सारी किताबें जो मेरे मन को बहुत ही सुकून देती। इस कमरे में जाने मात्र से ही दिन भर का तनाव खत्म हो जाता था। और एक नई ऊर्जा का ...
सोचना ही है तो कुछ ऐसा सोचो कि तुम्हारी कमजोरी नहीं बल्कि शक्ति बन जाए| करना है तो कुछ ऐसा करो कि तुम्हारी स्थिति नहीं बल्कि परिस्थिति बदल जाए। रोना ही है तो ऐसे रोओ कि कुछ पाने के लिए एक जिद् बन जाए। चीखना है तो ऐसे चीखो कि समाज में क्रांति आ जाए। बनना है तो कुछ ऐसा बनो कि लोगों के लिए एक मिसाल बन जाए।
दिनांक 4 .4 .2024 नाम- अलका शुक्ला पद- सहायक अध्यापक विद्यालय- प्राथमिक विद्यालय हीरागंज (1-5) सफलता एवं संघर्ष की कहानी प्रथमनियुक्ति -30. 8. 2016 प्रारंभिक परिचय -अलका शुक्ला BA ,MA BTC, PGDCA,IGD, Fashion. Designing वर्तमान कार्य क्षेत्र-प्राथमिक विद्यालय हीरगंज विद्यालय की समस्या एवं समाधान- 30. 8 .2016 को प्राथमिक विद्यालय हीरागंज में प्रथम नियुक्ति हुई । विद्...